शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2018


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हक़ीक़त की नसीहत से जंग छिड़ी है 
भरोसे और यक़ीन में बेचैन्गी बढ़ी है 

झूठ के घोड़े इस कदर बेलगाम हो गये 
सच की बुनियाद की चूलें हिली पड़ी हैं 

अगर हूँ गलत करो झूठा साबित मुझको 
बदपरहेज़ लब्जों से मारो गोली मुझको 

19102018

बुधवार, 5 सितंबर 2018

सादर प्रणाम ...


आज बच्चे हमारे ऊपर हैरत करते हुऐ जरूर हस सकते  है कि ,
हमारा भी बचपन कबूतर खरगोश गमला घडी पढ़कर बड़ा हुआ है
क से कबूतर , ख से खरगोश , ग से गमला , घ से घडी
स्कूल से निकलते हुऐ सबका एक साथ में चिल्लाते हुऐ जाना
किसी नारे जैसा सच्चा लगता था , यही सच है हमारे बचपन का
और दो इकम दो , दो दूनी चार का पहाड़ा तो जब कक्षा में गूंजता
सभी बच्चो में राष्ट्रिय गीत के जैसा जोशीला एहसास कराता था
अरे हां !! बीस के पहाड़े तक याद करने में कितना थप्पड़ खाये याद नहीं
हमारे पास में तब ना चॉक होती थी और ना ही खड़िया होती थी
हमारी दोपहर रोज़ तख्ती पर मुल्तानी का घस्सा लगाने में गुजरती थी
लिखने में अगर मुश्किल आती तो बढ़िया वाली डांट लगती थी
कभी सबक सुनाने में देरी होती तो फिर लठोरी से नपाई भी होती थी
पिटाई होने पर आजकल की तरह घर से कोई नहीं जाता था स्कुल
और फिर हम सभी आगे की क्लास में बढ़ गए , मास्टर जी उसी क्लास में रह गए
और एक दिन सुना रिटायर हो गए , एक एक  करके फिर सभी दोस्त निकलने लगे
कोई इंजीनियरिंग करने चला गया , कोई डाक्टरी , किसी का नंबर बैंक में आ गया
तो किसी ने पिता की दुकान को पर बैठना शुरू किया और कोई अध्यापक बन गया
हमारा बचपन जो कायदा पहाड़ा से शुरू हुआ  ... बाद में उसी की बदौलत
कोई कबूतर बन गया कोई खरगोश आज जो भी हैं आधे अधूरे सफल असफल
सभी कुछ प्राथमिक विद्यालय अध्यापको की पढाई प्यार और पिटाई की बदौलत
उनके गुस्से में असीम प्यार होता था  ... आज भी वे यादें ह्रदय गति को ऊर्जा देती हैं
अंत में  ... प्राथमिक विद्यालय के सभी अध्यापको को  ... सादर प्रणाम
#सारस्वत 05092018 

शनिवार, 25 अगस्त 2018

कल रक्षाबंधन है ...

शाम को घर लौटते हुए 
अचानक रजत की दुकान पर नज़र ठहर गई 
कदम रुक गए याद आया , 

कल रक्षाबंधन है भाई बहन का त्यौहार 
सुबह ही बेटी ने याद दिलाने वाले अंदाज़ में कहा था 
और उसने अपने भाइयों के लिए राखी लाने के लिए बोला था 

रजत से दोनों बेटो के लिए राखी खरीदकर 
थके कदमों के साथ घर में दाखिल हुआ 
बेटी ने दौड़ कर पानी का गिलास थमाया 
और मुस्कुराते हुये सवालिया निगाहों से मुझे देखने लगी 

मैंने भी मुस्कुराते हुए 
उसके हाथ में राखी का लिफाफा रख दिया , 
लिफाफे को लेकर आंगन की चिरईया 
अपने भाइयों की तरफ दौड़ी 
मैं कपडे बदलने लगा , 
बराबर के कमरे से 
तीनो बच्चो की खिलखिलाकर हसने की आवाज आ रही थी 
उनकी आवाजे आत्मा को सुकून दे रही थी 
अंतर्मन की उदासी को दूर कर  रही थी 

अचानक से आवाज़े ख़ामोशी में तब्दील हो गई 
जब छोटे ने पूछा 
पिता जी की राखी किधर है 
और जवाब उसकी माँ ने दिया 
तुम्हारे पिताजी की बहने राखी भेजती कब हैं  ... 

और मुझे याद आने लगा 
राखी का वो मनहूस दिन 
जब पिताजी ने आखरी साँस ली थी !!!!!
#सारस्वत 
25082018 

सोमवार, 20 अगस्त 2018

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सिलसिला मुलाकात का , यूँ हो रहा    ... जवां दिन बदिन 
मोहब्बत पहली नज़र की , इज़हार रोज़ का  ... रातो दिन 
#सारस्वत 
20082018 

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

अटल ...

#सादर_नमन 
जिद्द का नाम होता है है अटल 
दृढ़ का नाम होता है अटल 
संकल्प का नाम होता है अटल 
निर्णय का नाम होता है अटल 
न झुकने वाला हठीला भी अटल
मजबूत इरादे वाला भी है अटल
एकम सच्चा नाम होता है अटल
विचार भी अभिमान भी अटल
माँ भारती का लाल है अटल
अनिवार्य स्थिर अचल हरपल अटल
साहसी बहादुर अडिग अमरत्व अटल
चलायमान समय सवमसंभू है अटल
काल के कपाल पर मोक्ष का आख्यान है
जो टाले ना टले वह मृत्यु होती है अटल
अटल मरता नहीं विश्वास है अटल
#सारस्वत
16082018

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

कारवां ...


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बगैर मेरे भी चलता रहेगा ज़माने का कारवां 
रुक गया  तो गया समझो उड़ा देगा कारवां 

हिस्सा हूँ  भीड़ का इसी भीड़ में खो जाऊंगा 
रौंद डालेंगे अपने करीबी लश्कर है कारवां 

मुड़कर देखने का रिवाज़ नहीं है दुनियां का 
निशाने पर  हम तुम सभी मज़हब है कारवां 

यक़ीन भरोसा एतबार लब्ज़ बेमानी हो गए 
मतलबों की दुनिया ये प्यारे मतलबी है कारवां 

वक्त की जद में है सब बस इतना समझले 
बाद मेरे भी चलता रहेगा ज़माने का कारवां 
#सारस्वत
20072018 

बुधवार, 13 जून 2018

यूँ ही ...

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कुछ कह रहा हूँ तुमसे  ... सुनो बस यूँ ही
पलकों की ओढनी से  , वो मुस्कुराई दी यूँही 
समय रुक सा गया , नैनो में उलझ कर के 
रुको !! जरा सा तुमभी ठहरो कुछ देर यूँ ही 
एक तुम्हारे दम पर ही , जीता हूँ हमदम 
ना होती तो , हार जाता सब कुछ यूँ ही 
सुनो जब जब कहता हूँ ... सुना है कुछ 
 बोलता है डर अंदर का , तब तब  यूँही 
खुद से अकेले में ... कुछ भी तो नहीं हूँ 
अकेला एक मैं नहीं , तुम भी हो यूँ ही 
आस उम्मीद ... अपनेपन का एहसास 
लौ विश्वास की , जलती रहती है यूँ ही 
समझ रही हो ना ... क्या कुछ कह रहा हूँ 
अभी पूछा भी ना था , वो मुस्कुराई दी यूँही 
#सारस्वत 
13062018