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मंगलवार, 17 मई 2016

मैंने पूछा ... कौन हो तुम

उसने कहा  ... वक़्त है पास में तो गुफ़्तगु कर लें
मैंने पूछा  ... कौन हो तुम
उसने कहा  ... तुझमें ही तो रहता हूँ , मुझे भी भूल गये
मैंने कहा  ... ऐसा नहीं है , भीड़ में हूँ भीड़ का हो गया हूँ
उसने कहा  ... अज़नबी क़रीब हुए तो , अपने पराये हो गये
मैंने कहा  ... तुझे सब पता है , रिस्तेनाते किसने भुला दिये
उसने कहा  ... कच्चे घरों में , रिश्ते मज़बूत होते थे
मैंने पूछा  ... थे से क्या मतलब है तुम्हारा  ...
उसने कहा  ... घर पक्के हो गये , रिश्ते मिटटी हो गये
मैंने कहा ... पहले हर आँगन में , नीम के पेड़ जरूर होते थे
उसने कहा  ... आँगन छोटे क्या हुए , पेड़ दरवाज़े हो गये
मैंने पूछा  ... बचपन में गायें होती थी तुम्हारे पास में
उसने कहा  ... जबसे बच्चे बड़े हो गये , कुत्ते शेर हो गये
मैंने पूछा  ... परिवार में क़रीब , अब कौन है तुम्हारे
उसने कहा  ... बेटियां कोख़ में खो गई , बेटे पैदा हो गये
#सारस्वत
17052016