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मंगलवार, 9 अगस्त 2016

उम्मीद ...


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उम्मीद पर जिंदा है यह दुनिया सारी 
उम्मीद से बड़ी शह  ... कोई चीज़ नहीं है 
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मरता है रोज़ आदमी यहां दिन एक बार 
जी उठता है फिर से नई उम्मीद के साथ 
मुझे उसका पता बताए कोई  ... जो कहता हो 
नई सुबह का सूरज उम्मीद नहीं है 
उम्मीद पर जिंदा है  ... 
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रास्ते बंद हो जायें सब , जब जीने के वास्ते 
खुलता एक रास्ता तब भी , उसी बंदिश के रास्ते 
झूठे हैं वो सभी  ... जो कहते हैं दुनियां से   
दोस्ती का मतलब  ... उम्मीद नहीं है 
उम्मीद पर जिंदा है  ... 
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ज़रूरी नहीं जो चाहो ,वो सब कुछ मिले तुझे 
जो नसीब में नहीं तेरे , परमेश्वर कैसे दे तुझे 
मैं हूँ अगर गलत  'तो, कर साबित गलत मुझे 
क्या परमात्मा के नाम में  ...  उम्मीद नहीं है 
उम्मीद पर जिंदा है  ... 
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छू कर जाये ग़म कोई 'तो, दुनिया ख़त्म नहीं होती 
उम्मीद पर क़ायम है दुनियां , वरना उम्मीद नहीं होती 
समय की धारा को 'खुद, वक़्त भी कोई बदल नहीं सकता 
मत कहना किसीसे उजाले का आना  ...  उम्मीद नहीं है 
उम्मीद पर जिंदा है  ... 
#सारस्वत 
09082016