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रविवार, 12 अप्रैल 2015

श्री राम लखन और जानकी …















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श्री राम लखन और जानकी  … मातपिता का रख के मान
बन को चले हैं बन बनवासी   …
बन को चले हैं बन बनवासी   …  रघुकुल रीत का रख सम्मान
श्री राम लखन और जानकी  …

समय काल  … था विकराल
प्रातःकाल  … ही होगई संध्या
समय चाल  … था  चला चाल
दुःखसागर  … में  डूबी अयोध्या
कोपभवन में  … हारे दशरथ  …
कोपभवन में  … हारे दशरथ  … जीता कैकई का अभिमान  ....
श्री राम लखन और जानकी  …

राज तिलक  … राज्य सिंहासन
राज कुँवर ने  … सबकुछ त्यागा
राज भवन  …  राज्य ऐश्वर्य
सिया ने तज के  … धर्म को साधा
कर्म निभाया  … अनुज लखन में  …
कर्म निभाया  … अनुज लखन में  … सकल अयोध्या हुई वीरान
श्री राम लखन और जानकी  …

जब चले  … सँग चले
सब चले  … नगर जन पक्षी
जब चले  … बह चले
नयन सिंधु  … धारा बन साक्षी
बन प्रवासी  … बन सन्यासी  …
बन प्रवासी  … बन सन्यासी  … चले सभी को कर प्रणाम
श्री राम लखन और जानकी  …
#सारस्वत
18102007