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सोमवार, 13 अप्रैल 2015

जलियावाला बाग













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ये मातृभूमि साक्षी है लाखों भूमिपुत्र बलिदानों की
हक की लड़ाई की ख़ातिर संघर्ष पूर्ण उड़ानों की
ये जलियावाला बाग कोई साधारण बाग नहीं है
ये पुण्य धरा है बलिदानी क्रांति के मतवालो की
निहत्थों पर जब बन्दूंके चलवाई कमज़र्फ डायर ने
गवाही देती चीखें हैं रक्तरंजित अंगेजी शाशनकाल की
जनसैलाब डटा हुआ था जब आज़ादी की लेकर के मांग
बेमौत मारे डाले गये सब वीर अमर शहीद दीवानों की
कण कण में बिखरी है इसके हठधर्मी की ज़ुल्म कहानी
यहां जान लूटा दी देश की खातिर ग़ुलाम हिंदुस्तान की
जब माटी खून से लाल हुई रक्तरंजित बिखरे थे लाल
रंग अमृतसरी घटी घटना बसंती जघन्य हत्याकांड की
#सारस्वत
13042015