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शनिवार, 12 सितंबर 2015

बहुत दूर निकल गया


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बहुत दूर निकल गया हूँ 
घर का रस्ता भूल गया हूँ 
बहुत दूर … 

छत चौबारे संकरी गलियाँ 
नीम के पेड़ की निम्बोलियाँ 
पीपल की छाँव गेहूं की बालियाँ 
भूल भुलैईया में भूल गया हूँ 
बहुत दूर … 

मिटटी की खुशबू गन्ने का खेत 
फिरकी चकरी कुश्ती लमलेट 
बेफ़िक्री की कुदान बोली में ठेठ 
भागदौड़ में सबकुछ भूल गया हूँ 
बहुत दूर …

वो कच्ची पगड्ण्डीयों पे चलना 
वो डोल पर लापरवाह सा बैठना 
वो देर रात गाँव का फेरा लगाना 
शहर के नक़्शेक़दम में भूल गया हूँ 
बहुत दूर … 

#सारस्वत 
10042014