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सोमवार, 10 मार्च 2014

"नेताजी"


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नेताजी
हमारे राजनीती के बड़े खिलाडी हैं
हर एक फण्डा आजमा कर देख लेते हैं
स्वार्थ सिद्धि का नाम ही तो है नेतागिरी
सारे जोड़ तोड़ वो बिठा कर देख लेते हैं
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नेताजी तो
सियासत के मंजे हुऐ अर्थशास्त्री ठैहरे
राजनीतिक पल्टियाँ दूर से देख लेते हैं
चुनाव से ठीक पैहले तो जाती धरम का
हिसाब किताब भी फैला कर देख लेते हैं
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नेताजी के
कितनी हवा है खिलाफत में सियासत में
सारा नुक्सान जोड़ घटा कर देख लेते हैं
जिसका साथ हो साथ में उसका हिसाब
नफे की किताब में बिठा कर देख लेते हैं
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नेताजी को
बार बार दल बदलने का कोई शौक नहीं है
बस कुर्सी का शौक सत्ता का स्वाद लेते हैं
सियासत कुत्ती शै है ये बात खूब जानते है
इसीलिए तो इस महकमें को खुद देख लेते हैं
#सारस्वत
10032014