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शनिवार, 14 जून 2014

एक मैं हूँ , एक तुम हो



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एक मैं हूँ ,   के   मैं   मैं   ना   रहा
एक तुम हो , जो रही तुम ही रही
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एक मैं हूँ , जो खुद को भूल बैठा हूँ
एक तुम हो , जिसे जरा भी याद नहीं
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एक मैं हूँ , वादे वफ़ा में जीता रहा
एक तुम हो ,के' वफ़ा का पता ही नहीं
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एक मैं हूँ ,जो' तुमसे जुदा हो ना सका
एक तुम हो , दिलसे कभी मिले ही नहीं
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एक मैं जिससे , तुम ही मिलने वाले थे
एक तुम हो ,  बिछुड़े फिर मिले ही नहीं
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एक मैं हूँ , किया ना कभी सवाल कोई
एक तुम हो , तुम्हारा तो जवाब ही नहीं
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एक मैं हूँ ,के' बाकी ना रहा कुछ भी
एक तुम हो , सब कुछ तुम ही रही
#सारस्वत
14062014