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बुधवार, 25 जून 2014

जिधर देखो उधर धर्म के ठेकेदार कई बैठे हैं












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जिधर देखो उधर , धर्म के ठेकेदार कई बैठे हैं
हर मोहल्ले में , धर्म के दुकानदार कई बैठे हैं

सोचता हूँ मैं भी , धर्माधिकारी बन जाऊँ
पकौड़ी प्रसाद में दूँ , पर्स खाली करवाऊं
अच्छा धंधा है , चुटकी राख अगरबत्ती का
गली गली में , परोपकारी व्योपार लिए बैठे हैं
जिधर देखो उधर , धर्म के  …
दान दक्षिणा से , टपकेगा नूर मुझ में भी
कर दूंगा प्रचार , हूँ चमत्कार खुद में ही
चमकेगा सितारा , फ़क़ीरी का अपना भी
आँख के अंधे , पढे लिखे बीमार कई बैठे हैं
जिधर देखो उधर , धर्म के  …
नये तजुर्बों की , क़िस्मत लिखवाता रहूँगा
जब तक जीऊँगा , बाबाजी बन कर रहूँगा
मरने के बाद तो , कीर्तिमान बन ही जाऊँगा
कलयुग में कई , भगवान यूँ ही बने बैठे हैं
जिधर देखो उधर , धर्म के  …
#सारस्वत
25062014