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सोमवार, 16 मार्च 2015

पता है , फिर भी ...

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कितनी लम्बी है जिंदगी यहां किसको पता है
फिर भी दावा मिलने का रोज़ करते हैं हम
कितनी लम्बी है जिंदगी  ...

मुश्क़िल से मिलती है जिंदगी सबको ही पता है
फिर भी गुनाह पर गुनाह किये जाते हैं हम
कितनी लम्बी है जिंदगी  ...

कितने सच्चे हैं हम सच में सब हमें पता है
फिरभी झूठ कितना अच्छे से बोल लेते हैं हम
कितनी लम्बी है जिंदगी  ...

हम आज भी कच्चे हैं हमें इसका भी पता है
फिर भी बेबाक़ बन कर दिखलाते हैं हम
कितनी लम्बी है जिंदगी  ...
#सारस्वत
12032012