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मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

झूठ सच हो चूका

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झूठे का झूठ नगरसेठ , धनवान हो चूका है
सत्य का सत्य निर्धन , गुमनाम हो चूका है
झूठ का झूठ नगरसेठ ...

रुख हवा का बता रहा , अभिमान का तिलक
अर्थ का अर्थ स्वार्थ से , पुरुस्कृत हो चूका है

आत्मसम्मान के गुम्बद की , झुक गई है क़मर
स्वार्थ सिद्धि को प्राप्त कर , परिष्कृत हो चुका है
झूठ का झूठ नगरसेठ ...

झूठ ने कर दिखाया , कीर्ति स्तम्भों का निर्माण  
घुट्टी में पिलाया गया , गबरु जवान हो चूका है
झूठ का झूठ नगरसेठ ...

सच्चाई के साथ में , प्रकाश अब चलता नहीं है
रोशन गलियों से सच का , बहिष्कार हो चूका है
झूठ का झूठ नगरसेठ ...

नगर खुशामदी राह पर , उन्नत विकसित होंगे
देख कर हश्र सत्य का , विवेक मौन हो चुका है
झूठ का झूठ नगरसेठ ...
#सारस्वत
08122015