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सोमवार, 14 दिसंबर 2015

सुनो ...



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हाथों की लकीरों में , ना ढूंढा कर मुझे 
बंद मुट्ठी में मिलता हूँ , हौसला कहते हैं मुझे 

मुझसे ना पूछा कर , दुनियादारी का सबक़ 
ईमानदारी रक्खा कर , समझदारी कहते हैं मुझे 

मैंने देखा आईने में , सूरत के अलावा कुछ ना था 
तूने किसको देखा बता , ज़मीर कहते हैं मुझे 

मना करने पर भी तूने , फ़रेब से दोस्ती कर ली 
दाग़ अपने तक रखना , दामन कहते हैं मुझे 

वादे ना किया कर , इंतजार को गुलामी कहते हैं 
इरादे किया कर , वफा का एतबार कहते हैं मुझे 

शक़ की गुंजाईश हो कहीं तो , रुखसती ले लेना 
रिश्तों की ईबादत हूँ  , यक़ीन कहते हैं मुझे 

पुरखों ने कमाया है जिसे , मैं वो दौलत हूँ 
सम्भाल कर रखना , इज़्ज़त कहते हैं मुझे 
#सारस्वत 
14122015