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शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

तू ही आदि .. तू ही अन्नंत .. श्रष्टि के पालनहार


















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तू ही आदि .. तू ही अन्नंत .. श्रष्टि के पालनहार ,
कण कण में .. तेरा डेरा बसेरा .. तू ही तारणहार ,

जल में,थल में .. नभ में पवन में ..  तेरी महिमां अपरम्पार ,
ह्र्दय ज्योति में .. प्रकाश दीप में .. तेरा ही संचार ,

चरण शरण में .. ध्यान रहे सदा .. ऐसा दो उपहार ,
जीवन दाता .. भाग्य विधाता .. कर दो तुम उपकार ,

नत मस्तक .. शाष्टांग वन्दना .. प्रणाम करो स्वीकार
ज्ञान ध्यान  ..  रहे श्री चरणों में  ..  प्रसाद में देदो प्यार
#सारस्वत
26022014