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बुधवार, 21 अक्तूबर 2015

लिखना होगा ...

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किस्से कहानियों को अब नए सिरे से लिखना होगा
मर्द जात की नामर्दी को स्वर्णाक्षर में लिखना होगा

औरत आज भी अबला है मंगल विजयी भारत में
बहन का रक्षक भाई नहीं आज का सच लिखना होगा

कभी कोख में मार डालते कभी दहेज की बलिवेदी पर
नहीं सुरक्षित बहु बेटियां साथ गर्व के लिखना होगा

भूलाना होगा पर्व भैया दूज रक्षा बंधन त्योहारों को
करो भ्रूण बेटी की हत्या ये कानून में लिखना होगा

बहुत पुराना राग तुम्हारा नारी नारी की दुश्मन है
बाप बेटी के हत्यारे हैं बेटे को घमंड ये लिखना होगा
#सारस्वत
26112014