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शनिवार, 10 मई 2014















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हर एक बात पे मुझसे , यूँ तुम पूछा ना करो
तीर'ऐ,नजरों से तुम , मुझको देखा ना करो
*
बात निकलेगी तो फिर , दूर तलक जाएगी
हर एक राज तुम यूँ , मुझ से पूछा ना करो
*
दिल जलता है सुलगता है , तन्हां रातों में
गुजरती रात का आलम , तुम पूछा ना करो
*
कुछ धडकता है सीनें में , और मैं मरता हूँ
इश्क कैहते है किसे , मुझ से पूछा ना करो
#सारस्वत
212013